उन स्वामी जी को याद करें 



आओ कविता चलें अतीत में, मिलकर भारत का गौरवनाद करें  !
नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद, उन स्वामी जी को याद करें  !!

विश्वनाथ दत्त के घर में जन्मे, माँ भुवनेश्वरी का मातृत्व पाया  
बिलेश्वर से माँगा था यह रत्न, इसीलिए बालक बिले कहलाया  
तार्किक बुद्धि, करुणा, संन्यासी प्रेम, इन गुणों ने जिसको महकाया  
हुक्के सारे एक सरीखे पिताजी, यह कहकर जाति भेद मिटाया
दीखने लगे जिसके पात चिकने, उस होनहार के लिए हरेक फरियाद करे 

           नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद........................













"ईश्वर दिखता है क्या", प्रश्न सीधा यह परमहंस पर दागा  
"तुम सम बतियाता हूँ मैं माँ से", यह सुन संभ्रम नरेंद्र का भागा 
धारा गुरु रामकृष्ण को ठोक बजाकर, दिव्य अनुभव अंतस में जागा 
धन,सुख, समृद्धि थे गए मांगने, पर माँ से भक्ति-विवेक-वैराग्य माँगा  
ऎसी दिव्य गुरु-शिष्य गौरव गाथा से,  आओ इक बार संवाद करें
 
          नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद........................



बनकर परिव्राजक भारत को जाना, नर सेवा को नारायण सेवा माना 
कन्याकुमारी की श्रीपाद शिला पर , भारतोद्धार का संकल्प ठाना  
"बहनों-भाइयों" कह शिकागो सम्मेलन जीता , दुनिया ने हिंदुत्व का लोहा माना  
कट्टरता, धर्मान्धता, मतान्तरण पर किया प्रहार, जग ने शांति मन्त्र को जाना 
निवेदिता, रामतीर्थ जैसों ने जिन्हें गुरु स्वीकारा, ऐसे संत का चित्रण आओ निर्बाध करें  

           नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद........................














राष्ट्रप्रेम का गहन समुद्र जिनके, अंतःकरण में हिलोरे लेता था  
भारत भू के व्यथितों का हाल, जिन्हें कष्ट असंख्य देता था  
लौटे भारत हुए आलिंगनबद्ध माटी में, भारत का स्वाभिमान जबरदस्त चेता था  
नवयुवकों को किया प्रेरित स्वातंत्र्य हित, "उत्तिष्ठत जाग्रत " का उद्घोष जिनका चहेता था  
"दरिद्रदेवो भव" के नव मन्त्र दाता, उस महामानव के लिए आओ जिंदाबाद करें 

           नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद........................


आओ कविता चलें अतीत में, मिलकर भारत का गौरवनाद करें  !
नरेन्द्रनाथ से बने विवेकानंद, उन स्वामी जी को याद करें  !!

Comments

  1. कविता स्वामी विवेकानंद जी के पूर्ण जीवन को समाहित किया है
    सुंदर

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  2. बहुत ही श्रेष्ठ कविता, गागर में सागर। बार पढ़ने का मन करेगा। शव्द कम अर्थों की परिधि असीमित।

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  3. काव्य के माध्यम से स्वामी जी के जीवन चरित्र का बहुत सुंदर वर्णन वाकई आप बहुमुखी प्रतिभा से परिपूर्ण हैं भाई साहब

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  4. उत्तम लेख तथ्यों से भरपूर कविता पर भाषा की सरलता इसे और ऊचाइयों पर ले जाता

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  5. प्रेरणादाई काव्य पाठ
    सरल व सहज भाषा
    अति उत्तम

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