Posts

स्वतन्त्रता आन्दोलन में संघ स्वयंसेवकों की भूमिका

Image
भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में संघ स्वयंसेवकों की भूमिका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अज्ञानतावश नहीं जानने वाले या राजनैतिक कारणों से जानना  नहीं  चाहने वाले लोग कई बार संघ की भारत के स्वाधीनता संग्राम की यात्रा में क्या   भागीदारी रही – यह  विषय खड़ा करते हैं | आशा है  निम्नोक्त बिन्दुओं को पढने के बाद किसी  की भी अंतरात्मा में फिर  कभी यह प्रश्न नहीं आएगा | संघ संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जीवन के तो अनेकों प्रसंग स्वाधनीता संग्राम में  बाल्यकाल से ही उनकी सक्रियता की गाथा कहते हैं | फिर चाहे वो 1897 में महारानी विक्टोरिया के   राज्यारोहण के 60 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अंग्रेजी शासन द्वारा उनके नीलसीटी हाई स्कूल में   बंटी मिठाई को कूड़ेदान में फेंक देने की घटना हो , 1901 में एडवर्ड सप्तम के इंग्लैंड के राजा बनने   के  प्रसंग पर एम्प्रेस मिल (नागपुर) में आयोजित आतिशबाजी कार्यक्रम में नहीं जाने का संदर्भ हो,   रिसले सर्कुलर के अनुसार वन्दे मातरम् पर प्रतिबन्ध के चलते 1910 में अपने स्कू...

सादगी, सहजता और जीजिविषा की प्रतिमूर्ति थे मेजर साहब

Image
सादगी, सहजता और जिजीविषा की प्रतिमूर्ति  थे मेजर साहब धर्मनिष्ठ  वीर हकीकत  और अतुलनीय जिजीविषा से भरे पृथ्वीराज चौहान के बलिदान दिवस वाले दिन यानी बसन्त पंचमी (5 फरवरी 2022) को  इन्हीं गुणों से पूरित मेजर करतार सिंह जी का देवलोक की ओर प्रस्थान कर जाना वास्तव में ईश्वरीय संयोग है | "आ गया सम्पर्क में जो, धन्यता पाई उसी ने" - यह पंक्ति हर उस व्यक्ति  का अनुभव रहा है , जो कभी भी मेजर साहब से एक बार भी मिल लिया |  मेजर साहब के पिता जी चौधरी राम सिंह द्वारा सेना में भर्ती होकर प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लेना,  स्वयं मेजर करतार सिंह जी द्वारा 1962, 1965 और 1971 के भीषण युद्धों में  अग्रिम पंक्ति में होकर भाग लेना और तीसरी पीढी के वीरचक्र विजेता वायुसेना के कैप्टन भूपेन्द्र जी द्वारा 1999 के कारगिल युद्ध में  भाग लेना वास्तव में हर सुनने वाले को भीतर तक रोमांचित और प्रेरित करता है |  परिवार  पिता चौधरी राम सिंह और माता चाँदकौर की सात संतानों में से सबसे बड़े करतार सिंह का जन्म 12 दिसम्बर 1933 को हुआ | माता जी का साय...

आजादी अमृत गीतांजलि : भारत की धरती से बाहर भारत माँ की आजादी के लिए किए गए प्रयासों को समर्पित

Image
  आजादी अमृत गीतांजलि भारत की धरती से बाहर भारत माँ की आजादी के लिए किए गए प्रयासों को समर्पित स्वरचित गीत ..... (गीत "आओ बच्चो तुम्हें दिखाएं ...."  की तर्ज पर) आओ मित्रों तुम्हें सुनाएं, कहानी हिंदुस्थान की । आजादी के अमृत हेतु, किए गए बलिदान की ।। वंदे मातरम् ,  वंदे मातरम् ,  वंदे मातरम् ,  वंदे मातरम्  सात समुद्र पार भी देखो, आजादी प्रयत्नों को । गदर पार्टी की नींव पड़ी, सोहन भाकना के यत्नों को । लाला हरदयाल करतार सराभा, ऐसे ऐसे रत्नों को । हिंदुस्तान गदर अखबार चलाया, गूंजे गदरी पन्नों को । अमेरिका कनाडा में भी, लगाते बाजी जान की ।।1।।    आजादी के अमृत हेतु, किए हर बलिदान की ........... लन्दन की धरती पर भी, दीवाने मतवाले  थे | श्याम जी कृष्ण वर्मा जैसे, वीरों ने सम्भाले थे  | इंडिया हाउस को केंद्र बनाकर,  क्रान्ति  लाने वाले थे  | सावरकर रचित पुस्तक को, अंग्रेज मिटाने वाले थे | कर्जन वायली की मुक्ति गाथा, धींगडा के यशगान की   ।।2।।   आजादी के अमृत हेतु, किए हर बलिदान की ........... उन्नीस सौ पन्द्रह में...

Self Time Management : Respect to GOD

Image
Self Time Management : Respect to God "Time and Tide wait for none" - this line underlines the very essence of time and time management. Lord Krishna in Shrimad Bhagwat Geeta describes himself as Kaal i.e. Time in lines " प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां , कालः कलयतामहम्" of Shloka 10.30 and " कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो" of shloka 11.32. So time itself is as important and holy as Almighty God. Acharya Chanakya says that even a moment can not be brought back on cost of precious pearls. Therefore wasting of time is a big blunder. " आयुष: क्षण एकोपि सर्वरत्नैर्न लभ्यते । नीयते तद् वृथा येन प्रामाद: सुमहानहो ।।"  Narad Ji in Narada Samhita says " क्षणार्धमपि व्यर्थं न नेयम्"  i.e. even a fraction of second should not be wasted. This is the level of importance of Time in our traditions. It is rightly said that killing time kills oneself. Therefore when Time Management is discussed, it implies Self Time management i.e managing self for maximu...

Parasmani Swami Vivekananda

Image
Parasmani Swami Vivekananda (Translated by Dr. Ranjeet Singh, Assistant Professor of Physics in Guru Jambheswar University of Science & Technology and Mentor of Vivekanand Vichar Manch in university.) The analogy of Parasmani (also known as philosopher's stone) truly fits to the personality of Swami Vivekananda.  Similar to the said capability of parasmani to convert iron into precious gold, the magnetic personality of this young Hindu monk, who completed his innings at a young age of merely 39, has transcended the lives of ordinary devotees as well as the lives of the eminent people in his contact. Let's talk about some of such names, whose personality is clearly refined by motivation from Swamiji's philosophy. Coming to the famous personalities outside India, one of them is - Nicola Tesla . Swami Vivekananda and renowned scientist Nicola Tesla first met in a show by Sarah Bernhardt, a French stage artist, which led to profound discussion between two giants of 1...

पारस मणि स्वामी विवेकानन्द

Image
  पारस मणि स्वामी विवेकानन्द स्वामी विवेकानन्द के व्यक्तित्व पर पारस मणि की उपमा सटीक बैठती हैं | जैसे पारस मणि द्वारा लोहे को बहुमूल्य सोने में बदलने की क्षमता के बारे में हम सुनते हैं , उसी प्रकार मात्र 39 वर्ष की अल्पायु में अपनी पारी पूरी करने वाले इस युवा संन्यासी के चुम्बकीय व्यक्तित्व से सामान्य भक्तों से लेकर ख्यातनाम लोगों ने अपने जीवन को स्वर्णिम बनाया है | ऐसे ही कुछ नामों की चर्चा करते हैं , जिनके व्यक्तित्व पर स्वामी जी के प्रत्यक्ष सान्निध्य की छाप साफ़ दिखाई देती है | भारत से बाहर के ख्यातनामों की बात करें तो इनमें एक नाम है -  निकोला टेसला | फ़्रांस की एक स्टेज कलाकार सारा बर्ननाट के एक शो में स्वामी विवेकानंद और प्रसिद्द वैज्ञानिक निकोला टेसला की प्रथम मुलाकात हुई और उसे बाद दोनों के मध्य काफी गहरा संवाद हुआ | बल, पदार्थ और ऊर्जा के आपसी सम्बन्ध को लेकर स्वामी द्वारा प्रतिपादित वेदान्त ज्ञान से टेसला बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने इसके गणितीय सूत्र पर काम करना प्रारंभ किया | स्वामी विवेकानंद के एक पत्र में वर्णित है – “मिस्टर टेस्ला सोचते हैं कि वे गणितीय सूत...